प्रदोष व्रत, शनिवार 24 अक्टूबर 2026: महत्व और परंपरा
प्रदोष व्रत शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को है।
सटीक तिथि आरंभ/समाप्ति समय के लिए देखें हमारा 24 अक्टूबर 2026 का पंचांग।
महत्व
प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि (13वें चंद्र दिवस) को, महीने में दो बार, प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के आसपास की संध्या वेला में मनाया जाता है। यह भगवान शिव को समर्पित है और पूजा के लिए शुभ समय माना जाता है।
आमतौर पर कैसे मनाया जाता है
सामान्य परंपराओं में दिन भर का उपवास जो प्रदोष काल की पूजा के बाद खोला जाता है, सूर्यास्त के आसपास शिव मंदिर में दर्शन, और स्थानीय परंपरा अनुसार जल, बिल्वपत्र आदि अर्पित करना शामिल है। ये परंपराएं क्षेत्र और परिवार के अनुसार भिन्न होती हैं – यह सामान्य जानकारी है, कोई निर्देश नहीं।
इस जानकारी पर एक टिप्पणी
यह एक व्यापक रूप से प्रचलित परंपरा की सामान्य, वर्णनात्मक जानकारी है, धार्मिक निर्देश नहीं। रीति-रिवाज
क्षेत्र, परिवार और व्यक्तिगत परिस्थिति के अनुसार भिन्न होते हैं। यह चिकित्सीय सलाह नहीं है; किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में व्रत रखने से
पहले डॉक्टर से सलाह लें। यहां कोई उपाय, उत्पाद या सेवा अनुशंसित नहीं की जाती।
स्रोत
- राष्ट्रीय पंचांग (1948 शक, 2026-27), पोज़िशनल एस्ट्रोनॉमी सेंटर, भारत मौसम विज्ञान विभाग – तिथि के लिए।
