बुध का तुला राशि में गोचर 26 सितंबर 2026: सही समय, वक्री की तारीखें और क्यों ट्रेंड कर रहा है
26 सितंबर 2026 की रात Google Trends इंडिया पर “बुध” टॉप सर्च में था। इसकी वजह एक कैलेंडर घटना है: बुध ग्रह शनिवार 26 सितंबर 2026 को कन्या राशि से तुला राशि में चले गए, लगभग दोपहर 12:30 बजे (IST)। वे 2 दिसंबर तक तुला में रहेंगे और 24 अक्टूबर को तुला में ही वक्री होंगे। सही तारीखें और उनका खगोलीय मतलब यहां है।
शनिवार, 26 सितंबर 2026, रात 9:59 बजे (IST) को तैयार किया गया। तारीख हमारे प्रकाशन सिस्टम की घड़ी से ली गई है। तथ्य नीचे दिए स्रोतों में उस समय जैसे बताए गए थे वैसे हैं और अब बदल चुके हो सकते हैं।
तुला में बुध एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| राशि परिवर्तन | कन्या से तुला |
| तारीख | शनिवार, 26 सितंबर 2026 |
| समय (IST) | लगभग दोपहर 12:30 बजे। प्रोकेरला (उज्जैन) में 12:36 बजे; कुछ हिंदी कैलेंडरों में 12:31 बजे; हमारी अपनी गणना में 12:29 बजे |
| तुला में कब तक | बुधवार 2 दिसंबर 2026, जब बुध वृश्चिक में जाएंगे (प्रोकेरला; हमारी गणना: लगभग शाम 5:18 बजे) |
| तुला में वक्री | शनिवार 24 अक्टूबर 2026 से (प्रोकेरला में तारीख है; हमारी गणना: लगभग दोपहर 1:54 बजे) |
| फिर मार्गी | शुक्रवार 13 नवंबर 2026, लगभग रात 10:18 बजे (हमारी गणना) |
| पिछला राशि परिवर्तन | बुध ने सोमवार 7 सितंबर 2026 को दोपहर 1:30 बजे कन्या में प्रवेश किया (प्रोकेरला) |
समय में कुछ मिनट का फ़र्क क्यों?
भारतीय पंचांग निरयन राशिचक्र और अयनांश (सायन राशिचक्र से अंतर) इस्तेमाल करते हैं, और अलग-अलग कैलेंडर थोड़ा अलग अयनांश मान और राउंडिंग लेते हैं। बुध तेज़ चलता है, इसलिए अयनांश में ज़रा सा फ़र्क राशि परिवर्तन के समय को कुछ मिनट खिसका देता है। इसीलिए एक ही घटना के लिए अलग-अलग स्रोत 12:29, 12:31 और 12:36 बजे बताते हैं। हम लाहिरी अयनांश इस्तेमाल करते हैं, जो राष्ट्रीय पंचांग में भी है।
मुख्य तारीखें एक तालिका में (IST)
| घटना | तारीख और समय |
|---|---|
| बुध का तुला में प्रवेश | शनिवार 26 सितंबर 2026, लगभग दोपहर 12:30 |
| बुध वक्री होंगे | शनिवार 24 अक्टूबर 2026, लगभग दोपहर 1:54 |
| बुध मार्गी होंगे | शुक्रवार 13 नवंबर 2026, लगभग रात 10:18 |
| बुध का तुला से वृश्चिक में जाना | बुधवार 2 दिसंबर 2026, लगभग शाम 5:18 |
24 अक्टूबर से 13 नवंबर तक, यानी लगभग तीन हफ्ते, बुध आसमान में पीछे की ओर चलता दिखेगा, और प्रोकेरला के अनुसार यह वक्री गति तुला राशि में होगी।
“बुध गोचर” क्या है?
गोचर का मतलब है भ्रमण, यानी किसी ग्रह का एक राशि से अगली राशि में जाना। बुध सूर्य के सबसे निकट का और पारंपरिक ग्रहों में सबसे तेज़ चलने वाला ग्रह है, इसलिए वह ज़्यादातर ग्रहों से अधिक बार राशि बदलता है। प्रोकेरला के अनुसार 2026 में बुध 14 बार राशि बदलता है और 3 बार वक्री होता है। भारतीय परंपरा में बुध को संवाद, शिक्षा, बुद्धि और व्यापार से जोड़ा जाता है, और सप्ताह का दिन बुधवार उसी के नाम पर है।
“वक्री” का क्या मतलब है?
वक्री एक दृष्टि-भ्रम है। जब पृथ्वी से देखने पर कोई ग्रह कुछ हफ्तों तक धीमा होकर रुकता और तारों के सामने पीछे की ओर चलता दिखता है, तो उसे वक्री कहते हैं। ग्रह सच में उलटा नहीं चलता; पृथ्वी और ग्रह अपनी कक्षाओं पर अलग गति से चलते हैं। बुध साल में लगभग तीन बार ऐसा करता है। जब वह पीछे चलना रोककर फिर आगे चलने लगता है तो उसे मार्गी कहते हैं।
भारतीय (निरयन) और पश्चिमी (सायन) राशियां अलग हैं
भारतीय पंचांग और पश्चिमी राशिचक्र में लगभग 24 अंश का अंतर (अयनांश) है, इसलिए एक ही ग्रह दोनों पद्धतियों में अलग राशि में हो सकता है और राशि परिवर्तन की तारीखें अलग होती हैं। इस पेज की सभी तारीखें भारतीय निरयन पद्धति की हैं।
26 सितंबर को और क्या था
26 सितंबर 2026 को भाद्रपद पूर्णिमा भी थी और पूर्णिमा श्राद्ध के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत हुई। हमारी पितृ पक्ष गाइड और रविवार 27 सितंबर का पंचांग देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बुध क्यों ट्रेंड कर रहा है?
क्योंकि बुध ग्रह शनिवार 26 सितंबर 2026 को लगभग दोपहर 12:30 बजे (IST) कन्या से तुला राशि में गए, जिसकी हिंदी समाचारों और ज्योतिष कैलेंडरों में खूब चर्चा है।
बुध तुला में कब तक रहेंगे?
2 दिसंबर 2026 तक, जब वे वृश्चिक में जाएंगे।
इस बार बुध वक्री कब होंगे?
24 अक्टूबर से 13 नवंबर 2026 तक, तुला राशि में।
क्या यह पेज हर राशि का फल बताता है?
नहीं। कई अखबार और ज्योतिषी राशि-वार भविष्यवाणियां छापते हैं। इन्फोटैब इंडिया भविष्यवाणियां नहीं छापता; इस पेज में केवल तारीखें और खगोलीय जानकारी है।
स्रोत
- प्रोकेरला: बुध गोचर 2026 की तारीखें (उज्जैन के लिए IST समय)
- प्रोकेरला: 27 सितंबर 2026 का पंचांग (हमारे पंचांग की जांच के लिए)
हमारी अपनी गणना: लाहिरी अयनांश के साथ खगोलीय लाइब्रेरी से बुध का निरयन भोगांश निकाला गया, यही तरीका हमारे दैनिक पंचांग में भी है।
