माँ शैलपुत्री का जन्म कैसे हुआ?

नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि माँ शैलपुत्री अपने पिछले जन्म में देवी सती थीं? उनके पुनर्जन्म के पीछे छिपी है प्रेम, अपमान, त्याग और भगवान शिव के प्रचंड क्रोध की अद्भुत कथा।

पिछले जन्म में देवी सती

नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि माँ शैलपुत्री अपने पिछले जन्म में देवी सती थीं? उनके पुनर्जन्म के पीछे छिपी है प्रेम, अपमान, त्याग और भगवान शिव के प्रचंड क्रोध की अद्भुत कथा।

जब दक्ष ने किया शिव का अपमान

राजा दक्ष को भगवान शिव का वैरागी स्वरूप पसंद नहीं था। उन्होंने एक विशाल यज्ञ आयोजित किया, जिसमें अनेक देवताओं और ऋषियों को आमंत्रित किया, लेकिन जानबूझकर भगवान शिव और माता सती को निमंत्रण नहीं भेजा।

पिता के घर पहुँचीं सती

सती अपने पिता के यज्ञ में पहुँचीं। वहाँ उन्होंने देखा कि भगवान शिव के लिए कोई यज्ञभाग नहीं रखा गया था। दक्ष ने सबके सामने शिव का अपमान किया। अपने आराध्य और पति का अपमान सुनकर सती अत्यंत व्यथित हो उठीं।

सती का महान त्याग

भगवान शिव का अपमान सहन न कर पाने पर देवी सती ने योगशक्ति से अपने शरीर का त्याग कर दिया। इस घटना से समस्त देवगण स्तब्ध रह गए। जब यह समाचार कैलाश पहुँचा, तब भगवान शिव का क्रोध प्रचंड हो उठा।

जब शिव का क्रोध जाग उठा!

सती के देहत्याग से भगवान शिव शोक और क्रोध से भर उठे। उन्होंने अपनी जटा से वीरभद्र को उत्पन्न किया। वीरभद्र ने दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया। बाद में भगवान शिव की कृपा से दक्ष को पुनर्जीवन मिला।

पर्वतराज हिमालय के घर

कालांतर में देवी सती ने पर्वतराज हिमालय के घर पुनर्जन्म का संकल्प लिया। हिमालय पर्वतों के राजा और प्रकृति के महान रक्षक माने जाते हैं, जो अब उनके पिता बनने वाले थे।

माता मैना की कोख से जन्म

रानी मैना, जो स्वयं परम भक्त थीं, उनकी कोख से देवी सती ने पुनः जन्म लिया। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण वे शैलपुत्री कहलाईं।

सती ने लिया शैलपुत्री रूप

यही देवी आगे चलकर पार्वती के नाम से प्रसिद्ध हुईं और पुनः भगवान शिव की अर्धांगिनी बनीं।

नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की आराधना

माँ शैलपुत्री नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल सुशोभित है। वृषभ उनका वाहन है। नवरात्रि के पहले दिन भक्त उनकी आराधना कर जीवन में स्थिरता, साहस और शक्ति की कामना करते हैं। जय माता दी!