भारत में कम उम्र की महिलाओं में बढ़ रहा ब्रेस्ट कैंसर, डॉक्टरों की चेतावनी

भारत में हेल्थ एक्सपर्ट्स बार-बार इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि यहां ब्रेस्ट कैंसर की पहचान ग्लोबल एवरेज से कम उम्र में हो रही है, और एक बड़ी संख्या में मामले 40 साल से कम उम्र की महिलाओं में भी सामने आ रहे हैं—इसलिए कई पश्चिमी देशों में इस्तेमाल होने वाली 40-45 साल की सामान्य स्क्रीनिंग उम्र का इंतज़ार करने की बजाय, पहले से जागरूकता और जांच पर ज़ोर देने की मांग बढ़ रही है।

डॉक्टरों के मुताबिक, भारत में यह पैटर्न कई वजहों से जुड़ा है—देर से मां बनना, कम समय तक ब्रेस्टफीडिंग, बदलती लाइफस्टाइल और खान-पान, और छोटे शहरों में सेल्फ-एग्ज़ामिनेशन व शुरुआती लक्षणों को लेकर कम जागरूकता। ऑन्कोलॉजिस्ट महिलाओं से अपनी फैमिली हिस्ट्री जानने और गांठ, त्वचा में बदलाव या लगातार दर्द को नज़रअंदाज़ न करने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि समय पर पहचाने गए मामलों में इलाज के नतीजे काफी बेहतर होते हैं।

इस अक्टूबर (ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस माह) में पब्लिक हेल्थ से जुड़े मैसेज में रूटीन सेल्फ-चेक, क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्ज़ाम और जोखिम वाली महिलाओं के लिए समय पर मैमोग्राफी पर फोकस किया जा रहा है, साथ ही टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्क्रीनिंग की पहुंच बढ़ाने पर भी, जहां अक्सर पहचान अब भी बाद के स्टेज में होती है।

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